_मैंग्रोव_पौधों_पारिस्थितिकी_तंत्र

#_मैंग्रोव_पौधों_पारिस्थितिकी_तंत्र

मैंग्रोव खारे पानी  तथा ताजे पानी वाले स्थानों पर उग सकते है, किंतु ताजे पानी  में इनकी वृद्धि सामान्य से कम होती है |
मैंग्रोव सामान्यत: #_उष्णकटिबंधीय_और_उपोष्ण_कटिबंधीय क्षेत्रो के तटो ज्वारनदमुख , ज्वारीय क्रीक , पश्च्जल  , लैगून  व पंक जमावों में विकसित होते ह

#_मैंग्रोव_की_विशेषताएँ

मैंग्रोव प्रजातियाँ अत्यधिक सहनशील होती है और प्रतिदिन खारे पानी के बहाव का सामना करती है |
मैंग्रोव पौधे अपनी जड़ों से पानी का अवशोषण करते समय लवण की कुछ मात्रा को अलग कर देते है तथा कुछ पौधें अपनी पत्तियों पर पाई जाने वाली विशेष कोशिका से अतिरिक्त लवण को बाहर कर देते है |

****मैंग्रोव पौधें अधिक नमक की मात्रा अपने ऊतकों  में सहन कर सकते है |

***यह पौधें अस्थिर भूमि में उगते है व तेज बहाव व तूफानों में भी मजबूती से खड़े रहते है, इन पौधों में श्वसन (Respiration)जड़ो का विकास होता है जिसके माध्यम से ये ऑक्सीजन  व कार्बन डाइऑक्साइड का आदान-प्रदान करते है | इन जड़ों को #_न्यूमेटोफ़ोर्स  कहते है

****मैंग्रोव प्रजातियों के नव अंकुरित पौधें में पर्याप्त मात्रा में खाद्य पदार्थ संचित होते है व पानी में तैरने के लिए इनमे संरचना पाई जाति है, जो इन्हें जीवित रहने में सहायता प्रदान करती है |

***वाष्पोत्सर्जन द्वारा पानी के उत्सर्जन को रोकने के लिए पौधों में मोटी चिकनी पत्तियां होती है |

****मैंग्रोव पौधों में ऐसे जड़े पाई जाती है जो गुरूत्वाकर्षण  के विपरीत बढ़ती है |

****जिन स्थानों में  मैंग्रोव पौधें उगते है वहां ऑक्सीजन की कमी रहती है | इस समस्या से निपटने के लिए इन पौधों में मैंग्रोव जड़े पाई   जाती है जिन्हें #_अनुकूलन जड़े कहते है |

#_मैंग्रोव_क्षेत्रों_का_वर्गीकरण

मैंग्रोव वनों को उनकी भौगोलिक स्थिति के आधार #_पर_4 भागों में विभाजित किया जा सकता है , यह वनस्पति विश्व के लगभग 48 देशों  पाई जाती है —

1.#_लाल_मैंग्रोव – इस क्ष्रेणी में वह पौधें आते है , जो बहुत अधिक खारे पानी को सहन करने की क्षमता रखते है तथा समुद्र के नजदीक उगते है |

2.#_काली_मैंग्रोव – काली मैंग्रोव (कच्छ वनस्पति) क्ष्रेणी के अंतर्गत आते है , जिनकी खारे पानी को सहन करने की क्षमता लाल मैंग्रोव वनस्पति की तुलना में कम होती है, ये सामान्यत: दलदल (marsh) में उगते है |

3..#_सफेद_मैंग्रोव – इनका नाम इनकी चिकनी सफेद सतह (छाल) के कारण पड़ा है, इन पौधे को इनकी जड़ो तथा पत्तियों की बनावट के आधार पर पहचाना जाता है |

4..#_बटनवुड_मैंग्रोव – ये झाड़ी के आकार के पौधें होते है तथा इनका नाम इनके लाल-भूरे रंग के तिकोने फलों के कारण पड़ा है , ये सफेद मैंग्रोव पारितंत्र के अंतर्गत ही आते है |

#_भारतीय_मैंग्रोव_समिति

42 वें संविधान संसोधन 1976 के अंतर्गत पर्यावरण की रक्षा करना प्रत्येक भारतीय का मूल कर्तव्य है |
भारत सरकार 1976 में मैंग्रोव समिति का निर्माण किया गया, जिसका उद्देश्य मैंग्रोव के संरक्षण एवं विकास के लिए सरकार को सलाह देना था, इसमें वैज्ञानिक शोध तथा मैंग्रोव विशेषज्ञों शामिल किया गया |

#_अंतर्राष्ट्रीय_स्तर_पर_मैंग्रोव_समिति

UNESCO, UNDP, IUCN, रामसर सम्मेलन, UNEP, Wetland International आदि ने मैंग्रोव क्षेत्रों के संरक्षण तथा प्रबंधन के कार्यक्रमों को निर्धारित किया है

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