_न्यूट्रिनो_वेधशाला_
#_न्यूट्रिनो_वेधशाला_(#आईएनओ)#_क्या_है
#_भारत में स्थित न्यूट्रिनो वेधशाला (आईएनओ) एक बड़ी विज्ञान परियोजना है. इसका उद्देश्य न्यूट्रिनो नामक कणों का अध्ययन करना है.
• न्यूट्रिनो वह मूल कण होते हैं जिनका #_सूर्य_तारों_एवं_वायुमंडल में प्राकृतिक रुप से निर्माण होता है.
• न्यूट्रिनो के बारे में पहले माना गया कि ये द्रव्यमान रहित कण हैं किंतु हाल ही में #_न्यूट्रिनो_दोलन_परिघटना के निरीक्षण द्वारा किए गए प्रयोगों से यह सिद्ध नहीं होता है.
#_अशून्य_न्यूट्रिनो_द्रव्यमानों के अस्तित्व के विभिन्न क्षेत्रों में गहन अर्थ हैं जो कि कण भौतिकी के प्रति मूलभूत रुचि होने के अतिरिक्त #_नाभिकीय_भौतिकी_भूभौतिकी, #_खगोलभौतिकी व कॉस्मोलॉजी की तरह अलग-अलग हैं.
• आईएनओ परियोजना में अन्य न्यूट्रिनो प्रयोग जैसे न्यूट्रिनो-हीन दोहरे बीटा क्षय (एनडीबीडी) भी शामिल होंगे. एनडीबीडी प्रयोगों से न्यूट्रिनो की प्रकृति (मैजारोना या डिरैक) का पता चलेगा. इस प्रयोग को नियंत्रण कक्ष #_केवर्न में स्थापित किया जाएगा.
#_कहां_से_आते_हैं_न्यूट्रिनो
वैज्ञानिकों के अनुसार हर पल हमारे यूनिवर्स में लाखों की संख्या में न्यूट्रिनो बनते हैं.
#_सूर्य_तारे_वातावरण_और_कॉस्मिक विकिरणों की क्रिया के कारण ये उत्पन्न होते हैं.
यूनिवर्स में उत्पन्न होने के बाद ये कण लम्बी यात्रा तय करते हुए धरती पर आते हैं. दरअसल यूनिवर्स में उत्पन्न हुए कई सारे अन्य कण भी धरती की और आते हैं, लेकिन इनमें से ज्यादातर कण धरती पर पहुंचने से पहले ही नष्ट हो जाते हैं. लेकिन न्यूट्रिनो कण बिना किसी दिक्कत के आसानी से अपनी यात्रा तय करके धरती पर पहुंच जाता है. इस कण के रास्ते में आने वाले तारे, गैलेक्सी और अन्य बधाएं भी इनको रोक नहीं पातीं और इस कण की यही खासियत इन्हें अन्य कणों से अलग बनाती है.
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