_पानी_के_नीचे_या_बीच_नदी_समुद्र_में_तेल_और_# #गैस_भंडारों_का_पता_कैसे_लगाया_जाता_है

#_पानी_के_नीचे_या_बीच_नदी_समुद्र_में_तेल_और_#
#गैस_भंडारों_का_पता_कैसे_लगाया_जाता_है

जमीन के नीचे तेल और गैस के भंडारों का पता लगाने की विधि को #_सीस्मिक_एक्सप्लोरेशन” कहा जाता है.
इस तकनीकी की मदद से तेल और गैस खोजने की #_शुरुआत_1859 के बाद शुरू हुई थी.

इस विधि में समुद्री जहाज की मदद से पानी के भीतर सीस्मिक वेव्स छोड़ीं जातीं हैं.

ये तरंगे पानी के भीतर विभिन्न प्रकार के पदार्थों
#_जैसे_चट्टान_तेल_और_गैस के भंडारों से टकरातीं हैं और वापस जहाज में लगे #_सीस्मोमीटर_हाइड्रोफ़ोन्स से टकरातीं हैं.
इस सूचना को एकत्र कर लिया जाता है और भूवैज्ञानिक इस डेटा का एनालिसिस सुपर कंप्यूटर की मदद से करते हैं.

जिसके बाद वे निष्कर्ष निकालते है कि किस जगह पर कितनी मात्रा में गैस और तेल के भंडार मौजूद हैं. बस उसी जगह पर तेल और गैस के निकालने की प्रक्रिया शुरू की जाती है.

#_साधारणतः इस पूरी प्रक्रिया में एक साल का समय भी लग जाता है.

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