इंटरनेशनल डे फॉर बायोलॉजिकल डाइवर्सिटी: 22 मई
इंटरनेशनल डे फॉर बायोलॉजिकल डाइवर्सिटी: 22 मई
22 मई को जैव विविधता के संरक्षण के बारे में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से दुनिया भर में इंटरनेशनल डे फॉर बायोलॉजिकल डाइवर्सिटी (जैव विविधता के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस) मनाया जाता है। इसका मुख्य ध्यान ऐसे पर्यावरण का निर्माण करना है, जो जैव विविधता में समृद्ध, टिकाऊ और आर्थिक गतिविधियों के लिए अवसर प्रदान कर सके।
थीम:
वर्ष 2018 के लिए इंटरनेशनल डे फॉर बायोलॉजिकल डाइवर्सिटी की थीम "सेलेब्रटिंग 25 इयर्स ऑफ़ एक्शन फॉर बायोडाइवर्सिटी" है। वर्ष 2018 जैव विविधता के 25 वर्ष को इंगित करता है।
जैव विविधता:
जैव विविधता जीवन और विविधता के संयोग से निर्मित शब्द है जो आम तौर पर पृथ्वी पर मौजूद जीवन की विविधता और परिवर्तनशीलता को संदर्भित करता है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (युएनईपी), के अनुसार जैव विविधता विशिष्टतया अनुवांशिक, प्रजाति, तथा पारिस्थितिकि तंत्र के विविधता का स्तर मापता है।
जैव विविधता किसी जैविक तंत्र के स्वास्थ्य का द्योतक है। पृथ्वी पर जीवन आज लाखों विशिष्ट जैविक प्रजातियों के रूप में उपस्थित हैं। सन् 2010 को जैव विविधता का अंतरराष्ट्रीय वर्ष, घोषित किया गया है।
जैविक विविधता पद का सर्वप्रथम प्रयोग वन्यजीवन वैज्ञानिक और संरक्षणवादी रेमंड एफ. डैसमैन द्वारा 1968 ई. में ए डिफरेंट काइंड ऑफ कंट्री पुस्तक में किया गया था।
जैव विविधता का तात्पर्य विभिन्न प्रकार के जीव−जंतु और पेड़-पौधों का अस्तित्व धरती पर एक साथ बनाए रखने से होता है। इसकी कमी से बाढ़, सूखा और तूफान आदि जैसी प्राकृतिक आपदा का खतरा बढ़ जाता है।
पारिस्थितिक संतुलन को बनाये रखने तथा खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने में भी जैव विविधता की अहम भूमिका होती है। इसलिए हमे प्रकृति से उपहार के रूप में मिले पेड़-पौधे, अनेक प्रकार के जीव-जंतु, मिट्टी, हवा, पानी, महासागर, समुद्र, नदिया आदि का संरक्षण करना चाहिए।
पृष्ठभूमि:
नैरोबी में 29 दिसंबर 1992 को हुए जैव-विविधता सम्मेलन में यह निर्णय लिया गया था, किंतु कई देशों के व्यावहारिक कठिनाइयां जाहिर करने के कारण इस दिन को 29 मई की बजाय 22 मई को मनाने का निर्णय लिया गया।
वैश्विक नेताओं ने भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक जीवित नक्षत्र सुनिश्चित करते हुए वर्तमान जरूरतों को पूरा करने के लिए 'सतत विकास' की एक व्यापक रणनीति पर सहमति व्यक्त की थी। 193 सरकारों ने इस पर हस्ताक्षर किए गए थे। भारत सीबीडी का एक पक्षकार है।
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