नरेंद्र मोदी सरकार के चार वर्ष

नरेंद्र मोदी सरकार के चार वर्ष....

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली एनडीए सरकार ने अपने 4 साल पूरे किए हैं। इन चार वर्षों में चुनाव से पहले किए गए कई वादों को पूरा करने की कोशिश की गई है जिनमें से कुछ में सफलता मिली है और कुछ में विफलता भी मिली है।

आइये जाने कि पिछले चार वर्षों में एनडीए सरकार किन क्षेत्रों में सफल हुई और किन क्षेत्रों में विफल।

उपलब्धियां:

दिवाला और दिवालियापन संहिता (आईबीसी): दिवाला और दिवालियापन संहिता (आईबीसी) वर्ष 2016 में लागू की गयी थी। एनपीए को काबू में करने यह संहिता एक महत्वपूर्ण कारक में रूप में कार्य कर रही है। वर्तमान में कुल बैंक एनपीए लगभग 9 लाख करोड़ रुपये है। अभी यह संहिता अपने शुरुआती दिनों में है और इसे मजबूत बनाने के लिए लगातार कई प्रयास एवं संशोधन किये जा रहे हैं।

ग्रामीण विद्युतीकरण: देश के शत-प्रतिशत गांवों में बिजली पहुंचने का काम पूरा हो चुका है। पिछले चार वर्षो में सरकार ने 18,452 ऐसे गांवों में बिजली पहुंचाने का काम किया है जिसे कुछ वर्ष पहले तक एक नामुमकिन कार्य माना जा रहा था। विश्व बैंक ने भी भारत सरकार के द्वारा तेजी से किये गए विद्युतीकरण की तारीफ़ की है।

सड़क: सड़क निर्माण की गति एक और उत्कृष्ट सफलता रही है। वर्तमान में, प्रतिदिन 40 किमी से अधिक दूरी तक सड़क का निर्माण किया जा रहा है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना: राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना (एनएचपीएस) मोदी सरकार की सबसे साहसी पहलों में से एक है। देश की 40 फीसदी आबादी यानी लगभग 10 करोड़ परिवार यानी 50 करोड़ लोगों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना में शामिल किया गया है।

यह विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना है. यह एक कैशलेस सुविधा है यानी अस्पताल में भर्ती होने पर मरीज को इलाज के लिए कोई भी भुगतान कैश में नहीं करना होगा। उनके इलाज पर होनेवाले पांच लाख रुपये तक का खर्च सरकार उठायेगी। इस योजना के लाभार्थी देश में कहीं भी पैनल में शामिल किसी भी प्राइवेट या सरकारी अस्पताल में इलाज करा सकेंगे।

जन धन योजना: जन धन योजना की वजह से भारत में वित्तीय समावेशन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। इस योजना की वजह से 312 मिलियन से अधिक नए बैंक खाते खोले गए हैं।

विफलताएं:

रक्षा क्षेत्र: सेना की जरूरतों और बजटीय आवंटन में गहरे फर्क से देश की सेना की तैयारियों पर गंभीर सवाल हैं। भारत का रक्षा बजट फिलहाल जीडीपी का महज 1.6 प्रतिशत है, जो 1962 में चीन के साथ जंग के बाद सबसे कम है।

चीन का 175 अरब डॉलर का सैन्य बजट भारत के 45 अरब डॉलर के बजट का तिगुना है। बजटीय प्रावधान का अभाव, मनमानी प्राथमिकताएं और सिकुड़ते पूंजी बजट के चलते सेना के आधुनिकीकरण के प्रजेक्ट लड़खड़ा रहे हैं।

विमुद्रीकरण और जीएसटी: वित्त मंत्रालय द्वारा विमुद्रीकरण को खराब तरीके से निष्पादित किया गया था। जीएसटी एक ऐतिहासिक पहल हैं लेकिन इसकी जटिलताओं की वजह से भारत की अर्थव्यवस्था में कमी आ गयी है।

गंगा नदी की सफाई: केंद्र सरकार ने नमामि गंगे और और कई अन्य योजनाएं चलाकर गंगा नदी को साफ़ करने की कोशिश की परन्तु ये प्रयास अभी तक धरातल पर दिखाई नहीं दिए हैं।

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