रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम (आरईआरए)
रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम (आरईआरए) के लागू होने के पश्चात हुए बदलाव:
रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 भारतीय संसद द्वारा पारित किया गया एक अधिनियम है जो घर खरीदारों के हितों की रक्षा करने के साथ-साथ रियल स्टेट उद्योग में निवेश को बढ़ावा देने में मदद करता है। 01 मई 2017 से यह अधिनियम लागू हो गया था।
यह अधिनियम रियल एस्टेट क्षेत्र के विनियमन के लिए राज्य स्तर पर ‘रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण’ (RERA) की स्थापना करता है और तेजी से विवाद निवारण के लिए एक निर्णायक निकाय के रूप में भी कार्य करता है।
सबसे बड़े रोजगार प्रदाताओं में से एक के रूप में, रियल स्टेट क्षेत्र भारत की जीडीपी में लगभग 6% योगदान देता है। इस अधिनियम का उद्देश्य पारदर्शिता लाना और विभिन्न हितधारकों के बीच जुड़ाव को फिर से परिभाषित करना है।
मुख्य प्रावधान:
डेवलपर्स के द्वारा किसी भी विज्ञापन और बिक्री से पहले आरईआरए के साथ प्रोजेक्ट्स को पंजीकृत करने की आवश्यकता।त्वरित न्यायाधिकरणों द्वारा विवादों का 60 दिन के भीतर समाधान।500 वर्ग मीटर या 8 अपार्टमेंट तक की निर्माण योजनाओं को छोड़कर सभी निर्माण योजनाओं को रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण में पंजीकरण कराना अनिवार्य है।ग्राहकों से ली गई 70 प्रतिशत धनराशि को अलग बैंक में रखने एवं उसका केवल निर्माण कार्य में प्रयोग का प्रावधान।परियोजना संबंधी जानकारी जैसे-प्रोजेक्ट का ले-आउट, स्वीकृति, ठेकेदार एवं प्रोजेक्ट की मियाद का विवरण खरीददार को अनिवार्यतः देने का प्रावधान।पूर्वसूचित समय-सीमा में निर्माण कार्य पूरा न करने पर बिल्डर द्वारा उपभोक्ता को ब्याज के भुगतान का प्रावधान। यह उसी दर पर होगा जिस दर पर वह भुगतान में हुई चूक के लिए उपभोक्ता से ब्याज वसूलता।रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण के आदेश की अवहेलना की स्थिति में बिल्डर के लिए 3 वर्ष की सजा व जुर्माने का प्रावधान एवं रियल एस्टेट एजेंट और उपभोक्ता के लिए 1 वर्ष की सजा का प्रावधान।
वर्तमान स्थिति:
आरईआरए के अधिनियम बनने के बाद, केवल 20 राज्यों ने नियमों को अधिसूचित किया है। यहाँ ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि केवल महाराष्ट्र, पंजाब और मध्य प्रदेश राज्यों ने ही स्थायी नियामकों को स्थान दिया है जबकि अन्य सभी राज्य अंतरिम नियामकों के साथ ही काम कर रहे हैं।
आरईआरए के आने बाद कम ब्याज दरों के साथ, संपत्ति की स्थिर कीमतें और किफायती आवास के लिए सरकार की ऋण सब्सिडी इसके सकारात्मक प्रभाव को दर्शा रहीं हैं। 2017 की चौथी तिमाही की तुलना में 2018 की पहली तिमाही में आवासों की मांग में आठ प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
इस अवधि के दौरान शीर्ष नौ शहरों में घरों की बिक्री में 33 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
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