निपाह वायरस
निपाह वायरस
दक्षिण भारत में निपाह वायरस तेजी से फ़ैल रहा है। केरल के कोझीकोड में इस निपाह वायरस से कई लोगों की मौत हो चुकी है। पुणे वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट ने खून के तीन नमूनों में निपाह वायरस होने की पुष्टि की है। केरल सरकार के अनुरोध पर एनसीडीसी की टीम केरल पहुंच गई है। इस वायरस से 75% मामलों में मौत हो जाती है।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने इस संबंध में एक कमेटी गठित की है। जो बीमारी की स्थिति जाने एवं लोगों का बचाव करने की कोशिश में जुटी है। इसके साथ वायरस की जद में ज्यादा लोग न आ सके इसके लिए उपाय किए जा रहे हैं।
क्या है निपाह वायरस?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, निपाह वायरस (एनआईवी) तेज़ी से उभरता वायरस है, जो जानवरों और इंसानों में गंभीर बीमारी को जन्म देता है। एनआईवी के बारे में सबसे पहले 1998 में मलेशिया के कम्पंग सुंगाई निपाह से पता चला था। वहीं से इस वायरस को ये नाम मिला। उस वक़्त इस बीमारी के वाहक सूअर बनते थे।
लेकिन इसके बाद जहां-जहां NiV के बारे में पता चला, इस वायरस को लाने-ले जाने वाले कोई माध्यम नहीं थे। साल 2004 में बांग्लादेश में कुछ लोग इस वायरस की चपेट में आए। इन लोगों ने खजूर के पेड़ से निकलने वाले तरल को चखा था और इस तरल तक वायरस को लेने जानी वाली चमगादड़ थीं, जिन्हें फ्रूट बैट कहा जाता है।
नए अध्ययन के अनुसार, निपाह वायरस चमगादड़ से फलों में और फलों से इंसानों और जानवरों में फैलता है। चमगादड़ और फ्लाइंग फॉक्स मुख्य रुप से निपाह और हेंड्रा वायरस के वाहक माने जाते हैं। यह वायरस चमगादड़ के मल, मूत्र और लार में पाया जाता है।
आरएनए या रिबोन्यूक्लिक एसिड वायरस परमिक्सोविरिडे परिवार का वायरस है, जो कि हेंड्रा वायरस से मेल खता है। ये वायरस निपाह के लिए जिम्मेदार होता है। यह इंफेक्शन फ्रूट बैट्स के जरिए फैलता है। शुरुआती जांच के मुताबिक खजूर की खेती से जुड़े लोगों को ये इंफेक्शन जल्द ही अपनी चपेट में ले लेता है।
लक्षण:
इस वायरस से प्रभावित शख्स को सांस लेने की दिक्कत होती है फिर दिमाग में जलन महसूस होती है। तेज बुखार आता है। वक्त पर इलाज नहीं मिलने पर मौत भी सकती है। इंसानों में निपाह वायरस एन्सेफलाइटिस से जुड़ा हुआ है, जिसकी वजह से ब्रेन में सूजन आ जाती है। डॉक्टरों के मुताबिक कुछ मामलों में 24-28 घंटे के अंदर लक्षण बढ़ने पर मरीज कोमा में भी चला जाता है।
उपचार:
निपाह वायरस का इलाज खोजा नहीं जा सका है। इसी वजह से मलेशिया में निपाह वायरस से संक्रमित करीब 50 फीसद लोगों की मौत हो गई। हालांकि प्राथमिक तौर पर इसका कुछ इलाज संभव है। हालांकि रोग से ग्रस्त लोगों का इलाज मात्र रोकथाम है। इस वायरस से बचने के लिए फलों, खासकर खजूर खाने से बचना चाहिए। पेड़ से गिरे फलों को नहीं खाना चाहिए। यह वायरस एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलता है।
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