सीबेड प्रोजेक्ट 2030
सीबेड प्रोजेक्ट 2030......
एक नई वैज्ञानिक परियोजना का लक्ष्य पानी के नीचे ड्रोन, व्यापारी जहाजों, मछली पकड़ने की नौकाओं और यहां तक कि खोजकर्ताओं के द्वारा एकत्रित किये गए डेटा का उपयोग करके वर्ष 2030 तक समुद्र तल के मानचित्र को निर्मित करना और दुनिया के लम्बे समय से चले आ रहे रहस्यों में से एक को हल करना है।
यह परियोजना अत्यधिक महत्वाकांक्षी है। 190 मिलियन वर्ग किमी पानी के साथ या 650 फीट की गहराई के साथ दुनिया के महासागरों का लगभग 93 प्रतिशत अभी भी मानचित्रित किया जाना बाकी है।
प्रमुख तथ्य:
सीबेड 2030 प्रोजेक्ट के निदेशक सतिंदर बिंद्रा ने कहा कि काम इस अवधि के भीतर पूरा किया जा सकता है। और यह प्रोजेक्ट सुनामी तरंग पैटर्न से लेकर प्रदूषण, मछली पकड़ने की गतिविधियों, नौवहन नेविगेशन और अज्ञात जमा खनिज आदि पर भी प्रकाश डालेगा।
यह परियोजना जापान के परोपकारी निप्पॉन फाउंडेशन और जीईबीसीओ, विशेषज्ञों के गैर-लाभकारी संगठन के बीच की एक सहभागिता है। ये विशेषज्ञ समुद्र तल के मानचित्रीकरण में पहले से ही शामिल है।
जीईबीसीओ अंतर्राष्ट्रीय जल विज्ञान संगठन और संयुक्त राष्ट्र सांस्कृतिक एजेंसी यूनेस्को के तहत काम करता है।
आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) के अनुसार, वर्ष 2010 में 1.5 ट्रिलियन डॉलर की तुलना में महासागरीय अर्थव्यवस्था के द्वारा वर्ष 2030 तक विश्व अर्थव्यवस्था में 3 ट्रिलियन डॉलर का योगदान किये जाने की उम्मीद है।
इस पहल को डच डीप सी एनर्जी प्रोस्पेक्टर फूगरो से समर्थन मिला है। फूगरो ने 65,000 वर्ग किलोमीटर का डेटा योगदान दिया है।
यह परियोजना, जिसकी अनुमानित लागत 3 बिलियन डॉलर है, राष्ट्रीय शोध निकायों के लिए तट के करीब का पानी छोड़ देगी। अमेरिकी नेशनल ओशिएनिक एंड एटमोस्फियरिक एडमिनिस्ट्रेशन अलग से इस पहल का समर्थन कर रहा है।
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