बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ: उपलब्धियां और प्रगति...


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 08 मार्च 2018 को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर राजस्थान के झुंझुनू में राष्ट्रीय पोषण मिशन का शुभारंभ किया और साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के विस्तार की शुरूआत भी की। इस कार्यक्रम का विस्‍तार कर वर्तमान में देश के 161 जिलों से बढ़ाकर 640 जिलों तक फैलाया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने अभियान की सफलता के लिए उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिलों को प्रमाण पत्र प्रदान किये। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कार्यक्रम की लाभार्थी माताओं और बालिकाओं से बातचीत भी की।

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना:

बच्चों के लिंग अनुपात (सीएसआर), जो 0-6 वर्ष आयु के प्रति 1000 लड़कों के तुलना लड़कियों की संख्या से निर्धारित होता है, में 1961 से लगातार घटोतरी जारी है। वर्ष 1991 में 945 से घटकर 2001 में 927 और फिर 2011 में यह अनुपात 918 होना खतरे की घंटी है। सीएसआर में घटोतरी महिला सशक्त्रिकरण में रूकावट का मुख्य सूचक है।

640 जिलों में से, 429 जिलों (देश के 2/3भाग में) में सीएसआर में गिरावट आई है। जबकि 244 जिले राष्ट्रीय औसत 918 से नीचे थे।

सीएसआर होने वाले बच्चे के लिंग चुनाव द्वारा जन्मपूर्व भेदभाव और लड़कियों के प्रति जन्म उपरांत भेदभाव को दर्शाता है। एक ओर लड़कियों के प्रति सामाजिक भेदभाव और दूसरी ओर खोजक यंत्रों की आसान उपलब्धि तथा उनका अनुचित इस्तेमाल करके लड़कियों की भ्रूणहत्या, बच्चों के लिंग अनुपात में अंतर का मुख्य कारण हैं।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना (BBBP) महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय एवं मानव संसाधन विकास मंत्रालय की एक संयुक्त पहल के रूप में समन्वित और अभिसरित प्रयासों के अंतर्गत बालिकाओं को संरक्षण और सशक्त करने के लिए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना की शुरुआत 22 जनवरी, 2015 को हरियाणा के पानीपत से की गई थी और जिसे निम्न लिंगानुपात वाले 100 जिलों में प्रारंभ किया गया था।

योजना का मुख्य उद्देश्य:

पक्षपाती लिंग चुनाव की प्रक्रिया का उन्मूलनबालिकाओं का अस्तित्व और सुरक्षा सुनिश्चित करनाबालिकाओं की शिक्षा सुनिश्चित करना

अब तक हुई प्रगति:

चरण -1 में (2014-15 अर्थात जनवरी, 2015), में यह योजना 100 जिलों के साथ शुरू की गयी थी और चरण -2 (2015-16, फरवरी 2016) में इसको 61 अतिरिक्त जिलों तक विस्तारित किया गया था। यह योजना अच्छी तरह से लागू हुई है और राष्ट्रीय एजेंडे के रूप में बाल लिंग अनुपात में सुधार की स्थापना करने में सफल रही है।

161 जिलों में प्रगति की स्थिति:

161 जिलों में से 104 बीबीबीपी जिलों में जन्म के समय लिंग अनुपात (एसआरबी) में सुधार की प्रवृत्ति दिखाई दे रही है। 119 जिलों ने रिपोर्ट किए गए एएनसी पंजीकरण के खिलाफ पहले त्रैमासिक पंजीकरण में प्रगति की सूचना दी है। पिछले साल की तुलना में 146 जिलों में कुल डिलीवरी के मुकाबले संस्थागत डिलिवरी में सुधार हुआ है।

डब्ल्यूसीडी, स्वास्थ्य और शिक्षा विभागों के समन्वय में जिला प्रशासन द्वारा की गयी स्थानीय स्तर पर अभिनव पहल से बीबीबीपी की बदलाव करने की क्षमता का मूल्यांकन किया जा सकता है। कुछ प्रमुख पहलें इस प्रकार हैं:

गुड्डी गुड्डा बोर्ड के माध्यम से सार्वजनिक स्थानों में जन्म के आंकड़ों का प्रदर्शन।सभी सरकारी भवन, सार्वजनिक कार्यालय, सरकारी / सार्वजनिक वाहन, सार्वजनिक परिवहन, स्कूल बसें बीबीबीपी लोगो का उपयोग कर रही हैं।लैंगिक प्रतीकों को समाप्त करने का प्रयास।नामांकन अभियान के माध्यम से, बालिका शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करना।बाल विवाह को रोकने के लिए राज्यों और जिलों द्वारा अभियान चलाए जा रहे हैं।बाल लिंग अनुपात में गिरावट के मुद्दे पर विशेष ग्राम सभा / महिला सभा का आयोजन।सिविल सोसाइटी संगठनों द्वारा थीम आधारित समर्थन।महिला और बाल विकास मंत्रालय ने इंटरनेशनल गर्ल चाइल्ड डे (यानी 11 अक्टूबर) के सप्ताह के दौरान "बेटी बचाओ बेटी पढाओ सप्ताह - नई भारत की बेटियां" मनाया।

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